गोदावरी देवी रामचंद्र प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर पुरानी बाज़ार नरकटियागंज , प . चम्पारण किसी राष्ट्र के भविष्य को आकार देने का प्राथमिक उत्तरदायित्व तीन ही लोगो पर होता है – माता । पिता एवं गुरु ( आचार्य ) | शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए प्रत्येक व्यक्ति का सर्वप्रथम कर्तव्य है कि हम समाज के लिए आदर्श उपयोगी एवं नैतिक मूल्यों से युक्त इकाई का निर्माण करें | इस पुनित कार्य के लिए हमारे पास सबसे सशक्त संसाधन – हमारे विद्यार्थी , जो सकरात्मक प्रेरणा प्राप्त कर निरन्तर कुछ नया और उपयोगी सिखने को तत्पर है । इनमें से आचार्य अर्थात् शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं । क्योंकि ये इस कार्य हेतु विशेष तौर पर प्रशिक्षित एवं चयनित होते हैं और अपनी क्षमतानुरूप अपने कर्तव्य को निभाते हैं । शिक्षक विद्यार्थियों , अभिभावकों एवं समाज के विश्वास पात्र होते है तथा इस विश्वास को पूरी सत्यनिष्ठा के साथ निभाना ही उसका परम कर्तव्य व धर्म होता है । वह प्रत्येक ! परिस्थिति में ( विद्यार्थी , अभिभावक , समाज ) इन तीनों के बीच विद्या , संस्कार , एवं अनुशासन रूपी । अमृत का वर्षा करते है । शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ एक स्वस्थ एवं संतुलित व्यक्तित्व ही किसी भी राष्ट्र के प्रगति का आधार शिला है और हमारे नवांकुर नित नई तकनीकियों से पोषित होते हुए , चारित्रिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास करते हुए अपने अभिच्छित लक्ष्य को प्राप्त कर अपने परिवार , समाज , राष्ट्र और अन्ततः सम्पूर्ण विश्व के सुयोग्य नागरिक के रूप में अपनी पहचान बना सके , यही मेरी शुभेच्छा तथा प्रयास है ।

शुभकामनाएं  —

नागेन्द्र कुमार तिवारी 

प्राचार्य